देशीआर्ट समाचार

तमिलनाडु विधानसभा: राज्यपाल आरएन रवि का वॉकआउट, राष्ट्रगान को लेकर बड़ा विवाद

शेयर करना

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मची है। आरएन रवि, राज्यपाल of तमिलनाडु ने विधानसभा के 2026 के पहले सत्र में ही ऐसी घटना घटा दी जिसने सदन के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। उन्होंने अपना भाषण पढ़े बिना ही सदन छोड़ दिया और आरोप लगाया कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। यह कोई मामूली झगड़ा नहीं था; यह संवैधानिक अधिकारों और प्रक्रियाओं पर केंद्रित एक गंभीर टकराव था।

सोमवार को शुरू हुए इस सत्र में, राज्यपाल ने दावा किया कि उनका माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया। विशेष रूप से, उन्होंने राष्ट्रगान को दिए गए सम्मान को लेकर आपत्ति जताई। दूसरी ओर, सरकार का तर्क था कि राज्यपाल को केवल सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण को ही पढ़ना चाहिए, न कि अपनी इच्छा अनुसार बदलाव करना।

राज्यपाल का वॉकआउट: क्या हुआ सदन में?

घटनाक्रम यह रहा कि जब सत्र शुरू हुआ, तो एम अप्पावु, विधानसभा अध्यक्ष ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण का पाठ करें। नियमों के अनुसार, विधानसभा में केवल विधायक ही राय दे सकते हैं, अन्य किसी को नहीं। लेकिन आरएन रवि ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया।

राज्यपाल ने सदन में कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरा भाषण बीच में रोका गया। मुझे निराशा हो रही है।" उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया गया" और "मेरा माइक बंद कर दिया गया, मेरा अपमान किया गया।" इसके बाद, बिना कुछ बोले वे सदन से बाहर चले गए। यह दृश्य देखते ही सदन में हंगामा मच गया।

बताया जाता है कि विवाद तब शुरू हुआ जब राज्यपाल ने सत्र की शुरुआत में पहले तमिल गाना बजाने और फिर राष्ट्रगान बजाने की मांग की थी। हालांकि, राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। सरकार का मानना था कि प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री स्टालिन का प्रतिक्रिया और खंडन प्रस्ताव

राज्यपाल के वॉकआउट के तुरंत बाद, एमके स्टालिन, मुख्यमंत्री of तमिलनाडु ने सदन में राज्यपाल के खिलाफ एक खंडन प्रस्ताव (Condemnation Motion) रख दिया। स्टालिन ने जोर देकर कहा कि विधानसभा के नियमों के अनुसार, राज्यपाल को सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में किसी भी प्रकार के बदलाव या छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है।

स्टालिन ने एक बार फिर अपने पुराने दावे को दोहराया कि देश में राज्यपाल का पद समाप्त हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "राष्ट्रगान का एक बार फिर अपमान किया गया है और मौलिक संवैधानिक कर्तव्यों की अनदेखी की गई है।" मुख्यमंत्री का मानना है कि राज्यपाल का भूमिका सिर्फ नाममात्र की होनी चाहिए, न कि सक्रिय राजनीति में शामिल होने की।

राजभवन का बयान: निवेश के दावों पर सवाल

राज्यपाल के कार्यालय राजभवन ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें उन्होंने सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण को पढ़ने से इनकार करने के कारणों को समझाया। राजभवन के बयान में कहा गया कि तैयार किए गए भाषण में कई निराधार दावे और गुमराह करने वाले बयान थे।

विशेष रूप से, राजभवन ने सरकार के उस दावे को चुनौती दी कि तमिलनाडु में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भारी निवेश हुआ है। राज्यपाल ने इसे 'सच से दूर' बताया। राजभवन के अनुसार, संभावित निवेशकों के साथ हुए कई समझौते (MOU) केवल कागजों पर ही रह गए हैं और वास्तविक निवेश नहीं हुआ है। यह दावा सरकार की आर्थिक उपलब्धियों पर सीधा सवाल उठाता है।

इतिहास और भविष्य: क्या यह चुनाव से पहले की राजनीति है?

यह घटना विधानसभा में राज्यपाल और सरकार के बीच पहली बार का विवाद नहीं है। पिछले वर्षों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां दोनों पक्षों के बीच मतभेद देखे गए हैं। अब जब तमिलनाडु में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं, तो इस तरह की घटनाएं राजनीतिक महत्व रखती हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव संविधान और राजनीति के बीच एक गहरे खांचे को दर्शाता है। एक तरफ जहां सरकार अपनी उपलब्धियों को हासिल कर रही है, वहीं राज्यपाल उनकी नीतियों और दावों पर सवाल उठा रहे हैं। यह स्थिति अगले कुछ महीनों में और तीव्र हो सकती है।

Frequently Asked Questions

राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा क्यों छोड़ी?

राज्यपाल आरएन रवि ने दावा किया कि उनका माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया। विशेष रूप से, उन्होंने राष्ट्रगान को दिए गए सम्मान को लेकर आपत्ति जताई और सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण को पढ़ने से इनकार कर दिया।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की प्रतिक्रिया क्या थी?

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यपाल के खिलाफ एक खंडन प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में बदलाव करने का अधिकार नहीं है और एक बार फिर राज्यपाल के पद को समाप्त करने की मांग की।

राजभवन ने सरकार के निवेश के दावों पर क्या कहा?

राजभवन ने सरकार के 12 लाख करोड़ रुपये निवेश के दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि कई समझौते (MOU) केवल कागजों पर हैं और वास्तविक निवेश नहीं हुआ है, जिसे उन्होंने 'सच से दूर' बताया।

क्या यह विवाद 2026 के चुनाव से जुड़ा है?

हाँ, चूंकि 2026 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इस तरह के राजनीतिक टकरावों का महत्व बढ़ जाता है। यह सरकार और राज्यपाल के बीच की बढ़ती असहमति को दर्शाता है, जो चुनावी राजनीति पर असर डाल सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पावु ने क्या भूमिका निभाई?

विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पावु ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण का पाठ करें और नियमों का पालन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में केवल विधायक ही राय दे सकते हैं, न कि अन्य कोई।

लेखक के बारे में

Vaishnavi Sharma

Vaishnavi Sharma

मैं एक अनुभवी समाचार लेखिका हूँ और मुझे भारत से संबंधित दैनिक समाचारों पर लिखना बहुत पसंद है। मुझे अपनी लेखन शैली के माध्यम से लोगों तक जरूरी सूचनाएं और खबरें पहुँचाना अच्छा लगता है।