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पश्चिम एशिया संकट: भारत सरकार ने दी ऊर्जा सुरक्षा का आश्वासन

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारतीय सरकार ने सोमवार को संसद में सभी दलों की बैठक बुलाई थी। इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य था सत्ता और विपक्ष दोनों को अपडेट करना ताकि देश एक ही स्वर से दुनिया की ओर देख सके। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री ने अध्यक्षता की, जबकि घर के भीतर सुरक्षा और बजट जैसे मामलों के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने भी भाग लिया। यह बैठक महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है, जो सीधे तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है。

यहाँ बात सिर्फ वास्तविकताओं की नहीं, हमारी तैयारी की है। सरकार ने साफ कहा कि देश के पास पेट्रोल या डिजल की कमी नहीं होने देगी। फिर भी, लोगों में डर था—खासकर टैंकों को भरते समय। गृह मंत्री अमित शाह, गृह मंत्री और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री ने उपस्थित होकर यह सिद्ध किया कि इस मुद्दे पर सर्वोच्च स्तर पर गौर हो रहा है। हालाँकि, रहूल गांधी, जो कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं, उस मीटिंग में शामिल नहीं हुए। कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने पूरी तरह से बहिष्कार किया। लेकिन अधिकांश ने भाग लिया।

ऊर्जा सुरक्षा: अब क्या बदलेगा?

सबसे बड़ा सवाल पूछा जा रहा था—कीमतें बढ़ेंगी या जंग लग जाएगा? भारत सरकार ने तुरंत स्पष्ट किया कि हम सुरक्षित हैं। पेट्रोलियम मंत्री हार्दिक सिंह पुरी ने एक चौंकाने वाली बात कही: देश में एलपीजी का उत्पादन 60% बढ़ा दिया गया है। यह कोई छोटी सी बात नहीं है। जब आपके घर की गैस सिलेंडर की चिंता आपको हर सुबह झोंकती है, तो 60% की वृद्धि एक राहत है। इसके अलावा, कई तेल भरे जहाज अभी अपने रास्ते पर हैं, सीधा भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

लेकिन सबसे नाजुक जगह हॉर्मुजundetstraits है। अगर यह बांद जाता है, तो आधा तेल रुक सकता है। सरकार का कहना है कि वे अपने जहाजों के लिए इस स्ट्रेट को खुला रखने का प्रबंध करेंगे। यह बहुत ही सूक्ष्म कार्य है। सैन्य रूप से हमारा फोकस सुरक्षा पर है, लेकिन व्यापारिक रूप से हम अपनी लाइनों बचा रहे हैं। विशेष समूह बनाए गए हैं जो इन सप्लाई चेन्स को देख रहे हैं।

जनहित और मानवीय मदद

क्रिसिस सिर्फ अंकड़ों में नहीं होती। असली कहानी उन लोगों की है जो वहां फंस गए थे। जानकारी के अनुसार, लगभग 4,25,000 लोग सुरक्षित वापस आए हैं। यह एक विशाल ऑपरेशन था। सरकार ने बताया कि वह निरंतर संचार बनाए रख रही है। बाहरी मामले मंत्री एस. जायशंकर, विदेश मंत्री ने विदेश सचिव के माध्यम से विस्तृत रिपोर्ट दी। उनकी कहना था कि भारत किसी के पीठ पर नहीं है। हमारी भूमिका मध्यस्थता की भी है।

पारितम्प्री मोदी, प्रधानमंत्री ने पहले लोक सभा और राज्य सभा में दोनों सदनों को संबोधित किया था। यह लगातार कमिटमेंट दिखाता है। अब सभी दलों को ब्रीफिंग देने का मतलब है कि चाहे सरकार परिवर्तित क्यों न हो, विदेशी नीति में स्थिरता बनी रहेगी।

आगामी परिप्रेक्ष्य

आगामी परिप्रेक्ष्य

यह स्थिति अस्थायी नहीं है। अमेरिका की ओर से 15 बिंदु वाले शांति प्रस्ताव की खबर है, लेकिन ईरान को क्षतिपूर्ति चाहिए। वे कह रहे हैं कि भविष्य में ऐसा दोहराएं नहीं। ये बातचीत चल रही हैं, लेकिन तनाव अभी भी मौजूद है। भारत के पास सात सशक्त समूह हैं जो सप्लाई चेन को माइनोर करते रहेंगे। यह हमारे लोगों की रक्षा करने के लिए आवश्यक है।

Frequently Asked Questions

क्या भारत में पेट्रोल की कमी होगी?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल, डिजल या एलपीजी की कमी नहीं होगी। एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और कई तेल के जहाज भारत के रास्ते पर हैं।

क्यों कांग्रेस के नेता मीटिंग में शामिल नहीं हुए?

खबरों के अनुसार, कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी पूरी तरह से बहिष्कार किया, हालांकि अधिकांश ने सहयोग किया।

गल्फ क्षेत्र में फंसे भारतीयों की हालत कैसी है?

लगभग 4,25,000 लोग目前已 safely evacuated हो चुके हैं। सरकार ने 7 सशक्त समूह बनाए हैं जो वहीं भारतीयों की सुरक्षा और वापसी पर नजर रख रहे हैं।

हॉर्मुजundetstraits खुला कैसे रहने वाला है?

विदेश मंत्रालय इस जल मार्ग को भारतीय जहाजों के लिए खुला रखने के लिए सभी संबंधित देशों के साथ संवाद कर रहा है। सप्लाई चेन सुरक्षित रखना प्राथमिकता है।

लेखक के बारे में

Vaishnavi Sharma

Vaishnavi Sharma

मैं एक अनुभवी समाचार लेखिका हूँ और मुझे भारत से संबंधित दैनिक समाचारों पर लिखना बहुत पसंद है। मुझे अपनी लेखन शैली के माध्यम से लोगों तक जरूरी सूचनाएं और खबरें पहुँचाना अच्छा लगता है।