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हिमाचल में 14 दिसंबर को ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी, 15 से साफ मौसम

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14 दिसंबर, 2025 को हिमाचल प्रदेश के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की उम्मीद है, लेकिन राज्य के मैदानी इलाकों में साफ आकाश रहेगा। शिमला मौसम केंद्र के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने यह जानकारी दी है। बर्फबारी का प्रभाव केवल लाहौल-स्पीति, चम्बा, कुल्लू और कांगड़ा के धौलाधार पर्वत श्रृंखला तक सीमित रहेगा। इसके बाद, 15 दिसंबर से 18 दिसंबर तक पूरे राज्य में साफ और शुष्क मौसम रहने की संभावना है।

बर्फबारी का असर कहाँ होगा?

शिमला मौसम केंद्र के अनुसार, इस पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव केवल 2,500 मीटर से ऊपर के क्षेत्रों में दिखेगा। लाहौल-स्पीति में तापमान ऋणात्मक रहा है — कुछ स्थानों पर -4°C तक। चम्बा के बाराबांकी और कुल्लू के बनिहाल जैसे इलाकों में भी बर्फ की संभावना है। धौलाधार के ऊँचे शिखर, जैसे मनाली के पास के बर्फीले मार्ग, भी इस बर्फबारी से लाभान्वित होंगे। लेकिन शिमला, धर्मशाला, उना या बिलासपुर जैसे निचले इलाकों में केवल हल्की बारिश या बर्फबारी की कोई संभावना नहीं है।

मौसम का लंबा सूखा: खेती के लिए चेतावनी

इस बर्फबारी के बावजूद, हिमाचल प्रदेश में अभी तक दिसंबर 13 तक कोई बारिश नहीं हुई है — पूरी तरह से 100% कमी। नवंबर 2025 में भी बारिश का स्तर 99% कम रहा। यह लगातार दो महीनों का असामान्य सूखा है। खेती करने वाले किसानों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। ज्यादातर जिलों में बीज बोने का काम अधूरा है। जमीन में नमी न होने के कारण आलू, आम और चेरी के बागान भी प्रभावित हुए हैं। कुछ किसानों ने कहा कि अगर अगले 15 दिनों में बारिश नहीं हुई, तो फसल की बुआई अगले साल तक टाल दी जाएगी।

तापमान और कोहरा: असामान्य गर्मी और घना धुंध

अजीब बात यह है कि शिमला और भूंटार में तापमान सामान्य से 3°C अधिक है। शिमला में 10.0°C, भूंटार में 2.6°C रिकॉर्ड किया गया। इसके बीच, बिलासपुर और मंडी में सुबह-शाम कोहरा छाया रहा — इसलिए 14 दिसंबर को मंडी, बिलासपुर और हमीरपुर के लिए पीली चेतावनी जारी की गई है। कोहरे के कारण ट्रैफिक बाधित हो रहा है और हवाई अड्डों पर उड़ानें टाली जा रही हैं।

15 दिसंबर के बाद क्या होगा?

14 दिसंबर की रात के बाद पश्चिमी विक्षोभ कमजोर हो जाएगा। इसके बाद, 15 से 18 दिसंबर तक पूरे हिमाचल प्रदेश में बादलों की कोई छाया नहीं होगी। आकाश साफ, हवा शांत और दिन गर्म, रातें ठंडी रहेंगी। यह एक अच्छी बात लगती है — लेकिन इसके पीछे एक बड़ा सवाल है: इस बर्फबारी क्या वास्तव में पानी की कमी को ठीक कर पाएगी?

क्या यह बर्फबारी पर्याप्त है?

नहीं। शिमला मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, लाहौल-स्पीति में अगले 24 घंटों में अधिकतम 5 सेमी बर्फ जम सकती है। यह एक छोटी बर्फबारी है — जो टूरिस्ट्स के लिए अच्छी है, लेकिन कृषि और जल संसाधनों के लिए नहीं। राज्य के बड़े नदी बेसिन, जैसे ब्यास और सतलज, अभी भी अपने सामान्य स्तर के 40% से कम पानी ले रहे हैं। यह स्थिति अगले गर्मियों में पानी की कमी को और बढ़ा सकती है।

पिछले साल का अनुभव क्या था?

2024 में भी हिमाचल में नवंबर-दिसंबर में बारिश की कमी रही थी। उस साल भी बर्फबारी देर से आई थी — और फसलें नुकसान पहुंची थीं। अब दो साल लगातार यही स्थिति दोहराई जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकता है — जिससे पश्चिमी विक्षोभ की आवृत्ति और तीव्रता बदल रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या इस बर्फबारी से किसानों की समस्या हल हो जाएगी?

नहीं। यह बर्फबारी केवल ऊँचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित है और यह बर्फ पिघलकर नदियों में पानी नहीं डालेगी। किसानों के लिए जमीन में नमी की कमी बनी रहेगी। जब तक निचले इलाकों में बारिश नहीं होगी, बीज बोने का काम नहीं शुरू हो सकता।

शिमला और भूंटार में तापमान अधिक क्यों है?

शहरी गर्मी और वातावरण में बदलाव के कारण। शिमला में निर्माण और वाहनों की वृद्धि ने तापमान को बढ़ाया है। भूंटार के निचले इलाके में हवाओं के पैटर्न बदल गए हैं, जिससे ठंडी हवाएँ नहीं पहुंच पा रहीं। यह एक लंबी अवधि की घटना है, जिसे वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन से जोड़ रहे हैं।

कोहरे की चेतावनी क्यों जारी की गई?

मंडी, बिलासपुर और हमीरपुर में सुबह-शाम घना कोहरा छाया है, जिससे दृश्यता 50 मीटर तक गिर गई है। इससे सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ रही हैं। शिमला मौसम केंद्र ने पीली चेतावनी जारी की है — जिसका मतलब है कि लोग सावधान रहें और अनावश्यक यात्रा न करें।

अगले दिनों में बारिश की संभावना क्या है?

18 दिसंबर तक कोई बारिश की भविष्यवाणी नहीं है। अगली संभावना 20 दिसंबर के बाद की जा सकती है, लेकिन वह भी अभी अनिश्चित है। यदि फरवरी तक बारिश नहीं हुई, तो राज्य के कई जिलों में पानी की संकट स्थिति आ सकती है।

हिमाचल में पिछले कितने सालों से बारिश कम हो रही है?

पिछले 7 सालों में नवंबर-दिसंबर की बारिश 40-60% कम रही है। 2019 के बाद से यह ट्रेंड तेज हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय की बर्फ के पिघलने और उप-हिमालय के आर्द्रता पैटर्न में बदलाव के कारण यह हो रहा है।

क्या यह बर्फबारी टूरिस्ट्स के लिए अच्छी है?

हाँ। मनाली, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में बर्फबारी से टूरिस्ट आकर्षित हो रहे हैं। बर्फ के साथ बर्फ फिसलन और स्कीइंग के अवसर बढ़ गए हैं। लेकिन यह सिर्फ टूरिस्ट्स के लिए फायदेमंद है — किसानों और पानी की आवश्यकता वालों के लिए नहीं।

लेखक के बारे में

Vaishnavi Sharma

Vaishnavi Sharma

मैं एक अनुभवी समाचार लेखिका हूँ और मुझे भारत से संबंधित दैनिक समाचारों पर लिखना बहुत पसंद है। मुझे अपनी लेखन शैली के माध्यम से लोगों तक जरूरी सूचनाएं और खबरें पहुँचाना अच्छा लगता है।

12 टिप्पणि

Saileswar Mahakud

Saileswar Mahakud

दिसंबर 15, 2025 AT 00:45

ये बर्फ तो सिर्फ टूरिस्ट्स के लिए अच्छी है, किसानों के लिए तो ये बर्फ भी नहीं, बर्फ का झूठ है। जमीन में नमी नहीं, पानी नहीं, बस बर्फ की फोटो और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

Rakesh Pandey

Rakesh Pandey

दिसंबर 16, 2025 AT 04:21

बर्फ आई तो अच्छा हुआ कम से कम लाहौल में तो बच गए लोग अब तो बस इंतजार है कब बारिश होगी वरना ये सूखा तो जानलेवा है

aneet dhoka

aneet dhoka

दिसंबर 17, 2025 AT 09:08

ये सब जानबूझकर किया जा रहा है। बर्फ तो सिर्फ ऊपरी इलाकों में आती है ताकि लोग सोचें कि पानी है, लेकिन नदियां अभी भी सूखी हैं। ये सब बड़े लोगों की साजिश है, जो जल संसाधनों को नियंत्रित करना चाहते हैं। जलवायु परिवर्तन? नहीं भाई, ये तो जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है।

Harsh Gujarathi

Harsh Gujarathi

दिसंबर 18, 2025 AT 06:44

बर्फ आई तो बहुत अच्छा हुआ 😊 अब बस थोड़ी बारिश और सब ठीक हो जाएगा 🙏 जल्दी ही बारिश होगी, विश्वास रखो!

Senthil Kumar

Senthil Kumar

दिसंबर 18, 2025 AT 22:37

बर्फ तो आ गई अब बस बारिश चाहिए। किसानों को जल्दी से बीज बोने दो। नहीं तो अगले साल भी बर्बादी होगी।

Vikram S

Vikram S

दिसंबर 20, 2025 AT 02:10

यह सब ग़लत जानकारी है! हिमाचल का मौसम अभी भी भारत का सबसे स्वच्छ और स्वस्थ है। ये बर्फबारी अच्छी है, और बारिश की बातें बस बाहरी शक्तियों का षड्यंत्र है जो हमारे संसाधनों को कमजोर करना चाहते हैं। अपने देश पर भरोसा रखो!

Vishala Vemulapadu

Vishala Vemulapadu

दिसंबर 20, 2025 AT 08:57

बर्फबारी का असर केवल 2500m+ के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हो रहा है, जो कि एक बहुत ही छोटा फ्रैक्शन है। इसके बावजूद, नदी बेसिन्स का वॉल्यूम 40% से भी कम है - ये एक क्लियर डिफिसिट इंडिकेटर है। जलवायु मॉडल्स के अनुसार, यह ट्रेंड अगले 5-7 साल में और बढ़ेगा।

ankur Rawat

ankur Rawat

दिसंबर 21, 2025 AT 02:50

बर्फ आई तो लगता है जैसे आसमान ने हाथ बढ़ाया है... पर देखो न, जमीन तो अभी भी बर्बाद है। किसानों के दिलों में बारिश की उम्मीद बस रही है, बर्फ की नहीं। ये बर्फ तो बस एक फिल्म की शुरुआत है - असली कहानी अभी बाकी है।

Kumar Deepak

Kumar Deepak

दिसंबर 22, 2025 AT 11:13

अरे भाई, बर्फ आ गई तो अब टूरिस्ट्स के लिए फोटो लेने का मौका मिल गया। किसानों के लिए तो ये बर्फ भी नहीं, बर्फ का टिकट है - जिसे लेकर वो खेत में नहीं जा सकते।

Ganesh Dhenu

Ganesh Dhenu

दिसंबर 23, 2025 AT 17:11

हमारे गाँव में तो बीज बोने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ। जमीन सूखी है, हवा भी गर्म है। ये बर्फ तो बस दूर के पहाड़ों पर है। यहाँ कोई नमी नहीं।

Yogananda C G

Yogananda C G

दिसंबर 24, 2025 AT 14:01

ये बर्फबारी बहुत छोटी है, बहुत छोटी! जितनी बर्फ जमेगी उतनी ही बर्फ पिघलेगी, और नदियों में बहेगी, लेकिन जमीन में नमी नहीं बनेगी! ये सिर्फ एक छोटी सी राहत है, एक छोटी सी बारिश की याद दिलाने वाली चीज, लेकिन असली समस्या तो बहुत बड़ी है! बारिश नहीं हुई, नदियाँ सूखी हैं, जमीन बर्बाद है, और फिर भी हम बर्फ की खुशी में नाच रहे हैं! ये तो बहुत दुखद है, बहुत दुखद! अगले 15 दिनों में बारिश नहीं हुई तो हम सबकी फसल बर्बाद हो जाएगी! बर्फ नहीं, बारिश चाहिए! बारिश! बारिश! बारिश!

Divyanshu Kumar

Divyanshu Kumar

दिसंबर 26, 2025 AT 03:37

बर्फ आने के बाद भी बारिश न होने का मतलब है कि ये प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक अस्थायी घटना है। कृषि के लिए यह अपर्याप्त है। जलवायु परिवर्तन के बारे में वैज्ञानिकों की चेतावनी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

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