लखनऊ के हॉस्पिटालिटी सेक्टर के किचन अब गैस के साफ अग्नि से दूर हैं, जहाँ एक समय था रसोई में चमकदार ग्लो थी, आज वहीं बूंदों-बूंदों धुएं से उठ रहा है। मार्च 2026 के इस महीने में शहर की प्रतिष्ठित हॉटल और रेस्तरांट अपनी रोजमर्रा की पकवान बनाने की प्रक्रिया बदलने पर मजबूर हैं। यह कोई स्वेच्छा से किया गया परिवर्तन नहीं है, बल्कि एक जबरदस्त व्यावसायिक संकट है।
लखनऊ की होटल इंडस्ट्री जिसने हमेशा उत्तर प्रदेश के व्यापार का मानक बनाए रखा था, वह अब कारगों के ढेर और लकड़ी के भट्ठियों की आवाज़ से घिरी हुई है। कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की भारी कमी के कारण करीब 99 फीसदी होटलों ने गैस का इस्तेमाल बंद करना पड़ा। यहाँ तक की शहर के सबसे भागे हुए क्षेत्र चारबाग में भी अब सुबह सुबह गैस वैन की जगह कोयले से भरे ट्रॉली दिखाई देते हैं।
आंतरिक बाजार पर वैश्विक तनाव का सीधा असर
यह स्थिति केवल местनी समस्या नहीं है, इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधियां जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हुए हमलों ने भारत में सिलेंडर आपूर्ति श्रृंखला को विस्थापित कर दिया। जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो ऊर्जा मार्केट पहले झटका लगता है।
समस्या का सूत्रधार थोड़े अलग तरीके से शुरू हुआ। पहले दाम में बढ़ोतरी आई, फिर आपूर्ति पूरी तरह रुक गई। डोमेस्टिक गैस में ₹60 की बढाव के बाद कमर्शियल सिलेंडर पर ₹115 का अतिरिक्त टैक्स् लागू हुआ। उसी दिन कंपनियों ने आपूर्ति रोक दी। यह निर्णय होटलियर्स के लिए किसी तूफान से कम नहीं था, जो उनके व्यवसाय की रीढ़ को चीर गया।
चारबाग से बारौती: संकट का विस्तार
चारबाग होटल एसोसिएशन की बैठकों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है। चारबाग क्षेत्र, जो लखनऊ का मुख्य खाद्य केंद्र है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहाँ के ठिकाने जो पहले दस मिनट में खाना तैयार करते थे, अब दोहरे समय ले रहे हैं।
सुरेंद्र शर्मा, प्रधान के अनुसार, "यह हमारे लिए临時的 व्यवस्था है, लेकिन हमें पता नहीं कि कब तक यह तंगी रहेगी।" उन्होंने बताया कि ग्राहक तो आ रहे हैं, लेकिन सेवा का स्तर अब गिरा है। कुकिंग की नई विधि में खाने की स्वादिष्टता में कमी आई है और कठिनाई बढ़ी है।
यह सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा। बाराबंकर जिला जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह प्रभाव दिख रहा है। हाईवे पर बने डhabas अब अपना व्यापार बंद कर चुके हैं क्योंकि वहां कोयला या लकड़ी मिलना मुश्किल है। छोटे व्यापारी जिन्होंने पहले गैस पर निर्भर थे, अब पूरी तरह ठप हैं।
कुकीं और ग्राहकों का हाल
रसोईघरों में काम करने वाले लोगों का हाल बेहाल है। एक शेफ ने कहा कि गैस पर खड़ा रहना आसान था, लेकिन अब धुएं में दम करना पड़ रहा है। आँखों में जलन और सांस लेने की तकलीफ आम बात बन गई है। कई कर्मचारी नौकरियों से छूटते जा रहे हैं।
ग्राहकों पर भी बोझ बढ़ा है। दामों में भारी उछाल हुआ है। चाय का दर 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो गया है, समोसे का दाम भी वही पैटर्न है। नजरिया बदल गया है। मेनुकार्ड पर 50 आइटम होने के बजाय अब सिर्फ 25 आइटम ही उपलब्ध हैं। यह इसलिए क्योंकि नए फ्यूल पर सब कुछ तैयार नहीं होता।
आर्थिक हिंसा और अनिश्चितता
कोयले की मांग बढ़ने से उसकी कीमत भी तेजी से बढ़ रही है। एक औसत होटल रोजाना एक क्विंटल (100 किग्रा) कोयला इस्तेमाल करता है। यह लागत वापस नहीं मिल रही है, क्योंकि ग्राहक मंहगाई सहन नहीं कर पा रहे।
कैटरर्स की भी मुसीबत बढ़ी। 15 मार्च 2026 को हजारों कार्यक्रमों के सिलेंडर नहीं मिल पाए। इससे उनकी प्रतिष्ठा को भी चोट लगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपूर्ति नहीं लौती, तो कई छोटी हॉटलें हमेशा के लिए बंद हो सकती हैं। यह केवल बिजनेस नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल बन गया है।
Frequently Asked Questions
होटेल्स में गैस की कमी क्यों हो रही है?
अंतरराष्ट्रीय तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का मुख्य कारण है। यूएस और इज़राइल के कार्यों ने ईरान से जुड़ी आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे भारत में कमर्शियल सिलेंडर की कमी पड़ी। इसके अलावा प्राइस हेज भी एक कारण है।
ग्राहकों की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?
खाने-पीने की लागत में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। चाय और नाश्ते जैसे सामान की कीमतें बढ़ी हैं, जैसे कि चाय 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो गई है। मेनू आइटम भी घट गए हैं।
क्या यह संकट ग्रामीण क्षेत्रों में भी है?
हाँ, बाराबंकर और आसपास के गांवों में भी डhabas और छोटे होटल बंद हैं। वहां लकड़ी या कोयले जैसी वैकल्पिक ऊर्जा की कमी अधिक है, जिससे व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है।
कब तक गैस की आपूर्ति ठीक होगी?
सुपुर्दा सुरेंद्र शर्मा के अनुसार, अभी कोई निश्चित समय तय नहीं है। संकट कब तक चलेगा यह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, और वर्तमान में उद्योग बहुत चिंता में है।