सोने की कीमतों में गिरावट का कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की शुरुआत में ही बढ़त से सोने की कीमतों में गिरावट आई है। जब भी अमेरिकी डॉलर में उछाल होता है, तब सोना और अन्य कीमती धातुओं की कीमतों पर नकारात्मक असर पड़ता है। ट्रंप के चुनाव जीते जाने की संभावनाओं के चलते निवेशक डॉलर की ओर आकृष्ट हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप डॉलर का मूल्य बढ़ गया है और सोने की कीमतों में गिरावट आई है।
ट्रंप की विदेश नीति
संभावित ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिकी विदेश नीति में अनिश्चितता की संभावना है। ट्रंप के प्रस्तावित आयात शुल्क और यूरोपीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले कर का संभावित असर निवेशकों को चिंतित कर रहा है। यदि आयात पर व्यापक कर लगता है, तो यूरोप की जीडीपी में गिरावट आ सकती है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता आ सकती है।सोना इस संदर्भ में एक दीर्घकालिक लाभकारी निवेश साबित हो सकता है, क्योंकि जब भी वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता होती है, सोने की मांग बढ़ जाती है।
डॉलर में उछाल
डॉलर की मजबूती की वजह से सोने की कीमतों में गिरावट आ रही है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत होने के संकेतों के कारण डॉलर की मांग बढ़ रही है। यूरो और जापानी येन भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहे हैं, जिससे डॉलर की स्थिति और मजबूत हो रही है। निवेशक ट्रंप के संभावित कार्यकाल में बुनियादी ढांचे में निवेश और कर कटौती की संभावनाओं को देखते हुए डॉलर की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
यूरोप पर संभावित असर
ट्रंप के नीतिगत प्रस्ताव, खासकर 10% आयात शुल्क, यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकते हैं। यूरोप के कुछ वस्तुओं पर सीधे तौर पर असर पड़ सकता है। इससे ना केवल यूरो की मूल्य में गिरावट हो सकती है, बल्कि यूरोप की आर्थिक वृद्धि भी कमजोर हो सकती है। रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस पर यदि पूर्ण नियंत्रण पा लेती है, तो यह नीतियां और भी प्रभावशाली ढंग से लागू की जा सकती हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
बाजार की प्रतिक्रिया
बाजार अमेरिकी चुनाव के परिणामों का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। सोने, डॉलर और स्टॉक के मूल्यों में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। निवेशक चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में बड़ी हलचल देखी जा सकती है। हालांकि अंत में ट्रंप की संभावित जीत प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक नीतियों में परिवर्तन ला सकती है।
इस प्रकार, सोने की कीमतों में गिरावट और डॉलर की मजबूती के पीछे अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य का बड़ा योगदान है। बाजार की स्थिति को समझना और निवेश के उचित अवसरों को पहचानना महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे अनिश्चितता भरे समय में।
11 टिप्पणि
Neelam Dadhwal
नवंबर 8, 2024 AT 12:03ये सब ट्रंप की चालें हैं जो दुनिया को धोखा दे रहे हैं! सोना गिर रहा है क्योंकि वो डॉलर को फेक नोट्स जैसा बना रहा है। अमेरिका के पास कोई असली अर्थव्यवस्था नहीं बची, बस ट्रंप अपने ट्वीट्स से बाजार घुमा रहा है। ये सब एक बड़ा फेक है, और हम लोग इसके शिकार बन रहे हैं।
जब तक दुनिया डॉलर पर भरोसा करेगी, तब तक ये नाटक चलता रहेगा।
Sumit singh
नवंबर 8, 2024 AT 17:39मानव व्यवहार के आधार पर ये सब एक सामाजिक-आर्थिक निर्णय का उदाहरण है। डॉलर की मजबूती = स्टैबिलिटी का सिग्नल, और सोना एक अतीत का आधार है जो अब ऑप्शनल है। निवेशक अब रिस्क-आडजस्टेड रिटर्न की ओर जा रहे हैं।
सोना तब तक रिस्क-ऑफ है जब तक बैंकिंग सिस्टम फेल नहीं होता।
fathima muskan
नवंबर 10, 2024 AT 13:02हा हा हा... ट्रंप की जीत से सोना गिरा? अरे भाई, ये सब फेड के साथ फ्रेम किया गया है! जब तक आप नहीं जानते कि बैंकिंग ग्रुप्स किसके लिए बुक कर रहे हैं, तब तक ये खबरें बस धुंधले बुलेटिन हैं।
सोना तो अभी भी लोगों के गोद में है... बस आपको उसे देखने के लिए अपने आँखों को खोलना होगा। 😏
Devi Trias
नवंबर 11, 2024 AT 17:11सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मांग में वृद्धि है, जो अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अपेक्षित स्थिरता और नीतिगत अनुमानों से जुड़ा है।
इसके अलावा, यूरो और येन के मुकाबले डॉलर की मजबूती ने वैश्विक विनिमय बाजार में एक स्पष्ट रूपांतरण ला दिया है।
सोना एक विकल्प है, लेकिन निवेशक अभी तक लिक्विडिटी और नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसलिए, यह एक अस्थायी घटना है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव अभी अनिश्चित है।
इसके अलावा, आयात शुल्क के प्रस्तावों का विश्लेषण अत्यधिक सावधानी से किया जाना चाहिए, क्योंकि ये बहुपक्षीय प्रभाव डाल सकते हैं।
सामान्य निवेशकों को अपनी पोर्टफोलियो को विविधीकृत रखना चाहिए।
सोना अभी भी एक आपातकालीन एसेट है, लेकिन इसकी भूमिका अब बदल रही है।
इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि निवेशक अपने निर्णयों को आँकड़ों पर आधारित करें, न कि भावनाओं पर।
मैं यह भी बताना चाहूंगी कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव अभी अनुमानित है।
हालांकि, यदि ट्रंप प्रशासन वास्तव में 10% आयात शुल्क लागू करता है, तो वैश्विक व्यापार श्रृंखलाएं बहुत अधिक प्रभावित होंगी।
इसलिए, इसके लिए एक बहु-पक्षीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
Kiran Meher
नवंबर 12, 2024 AT 09:52भाई ये सब बहुत बढ़िया है लेकिन डॉलर बल्कि सोना भी तो एक ही चीज है जिसे लोग अपने भरोसे में रखते हैं
अगर ट्रंप जीत गए तो भी तो ये सब बदलेगा नहीं
मैं तो बस ये कहना चाहता हूँ कि अपने पैसे को जगह जगह बांट लो
कभी सोना कभी डॉलर कभी अपने देश की बॉन्ड्स
कुछ भी नहीं एक जगह रखो
सब कुछ ठीक हो जाएगा भाई साहब 😊
Tejas Bhosale
नवंबर 13, 2024 AT 14:12लिक्विडिटी फ्लो ने रिस्क असेट्स को डिप्रीशिएट कर दिया है
डॉलर का डिमांड साइड शॉर्ट टर्म फैक्टर है
सोना अब एक लॉन्ग टर्म हेज है
पर अभी तक नो ऑप्शन नो गेम
जब तक फेड नहीं बदलता, तब तक ये रूल चलता है
ट्रंप बस एक फैक्टर है, ना कि कारण
Asish Barman
नवंबर 14, 2024 AT 03:45हाँ हाँ ट्रंप की वजह से सोना गिरा... तो फिर पिछले चुनाव में क्या हुआ? क्या तब भी सोना गिरा था? क्या तुमने कभी एक बार बैकग्राउंड चेक किया है? ये सब बस न्यूज फेड है।
सोना तो उतना ही गिरा जितना कि बाजार ने चाहा।
और डॉलर बढ़ा क्यों? क्योंकि अमेरिका अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा गंदा बैंक है।
Abhishek Sarkar
नवंबर 15, 2024 AT 09:41ये सब बहुत बड़ा गुप्त षड्यंत्र है। ट्रंप को जीतने के लिए बनाया गया एक स्क्रिप्ट है जिसे फेड, वॉल स्ट्रीट और कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां एक साथ चला रही हैं।
सोना गिर रहा है क्योंकि वे चाहते हैं कि लोग डॉलर में निवेश करें, ताकि वे अपने बॉन्ड्स को बेच सकें।
जब तक आप यह नहीं जानते कि अमेरिका के पास 20 ट्रिलियन डॉलर का ऋण है, तब तक आप इसका असली कारण नहीं समझ पाएंगे।
सोना तो अब भी एक असली मूल्य है, लेकिन उनके पास इसे खरीदने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वे इसे नियंत्रित करना चाहते हैं।
हर एक बाजार की गिरावट एक राष्ट्रीय सुरक्षा योजना है।
जब आप देखते हैं कि डॉलर बढ़ रहा है, तो आपको यह सोचना चाहिए कि यह किसके लिए फायदेमंद है? क्या यह आपके लिए है? नहीं।
यह बैंकिंग एलिट्स के लिए है, जो अपने निवेश को बचाने के लिए आपके पैसे को फंसा रहे हैं।
यह सिर्फ एक आर्थिक युद्ध है, और हम उसके सामने खड़े हैं।
अगर आप इसे समझना चाहते हैं, तो आपको अपनी आँखें खोलनी होंगी।
यह नहीं कि सोना गिरा है, बल्कि यह है कि आपकी जागरूकता को नीचे दबाया जा रहा है।
Niharika Malhotra
नवंबर 17, 2024 AT 02:53हर अनिश्चितता के समय में, इंसान अपने भीतर की शांति की ओर तलाश करता है।
सोना एक भौतिक रूप है, लेकिन उसके पीछे वही आत्मा छिपी है जो हम अपने भीतर ढूंढते हैं।
डॉलर जितना मजबूत होता है, उतना ही हम अपने भीतर के डर को बढ़ा रहे होते हैं।
लेकिन याद रखिए - बाजार बदलते हैं, लेकिन मानवीय विश्वास नहीं।
आपका निवेश आपके विश्वास का प्रतिबिंब है।
अगर आप शांत हैं, तो आपका निवेश भी शांत होगा।
अगर आप डरते हैं, तो आपका निवेश भी डरेगा।
इसलिए, अपने भीतर की शांति को खोजिए - वही असली सोना है।
हम सब एक ही रास्ते पर हैं।
सिर्फ अलग-अलग दिशाओं में देख रहे हैं।
आपका रास्ता भी सही है।
Baldev Patwari
नवंबर 18, 2024 AT 08:09ये सब बकवास है। ट्रंप की वजह से सोना गिरा? तो फिर आपने इसके पहले के चार साल का डेटा देखा? नहीं न? तो फिर ये बातें क्यों लिख रहे हो?
सोना तो हर बार गिरता है जब भी अमेरिका थोड़ा भी अच्छा लगता है।
और आप लोग इसे नया खबर बना रहे हो।
बस एक दिन बाद में ये सब भूल जाओगे।
harshita kumari
नवंबर 19, 2024 AT 15:11सोना गिर रहा है क्योंकि वे अभी भी इसे नियंत्रित कर रहे हैं।
हर बार जब भी एक चुनाव होता है तो वे सोने की कीमतों को नीचे दबा देते हैं ताकि लोग डॉलर में निवेश करें
फिर जब लोग डॉलर में फंस जाते हैं तो वे अचानक डॉलर को गिरा देते हैं और सोना फिर से बढ़ जाता है
ये एक चक्र है
और आप लोग इसे नहीं देख पा रहे
क्योंकि आपको बताया जा रहा है कि ये सब बाजार की बात है
पर ये बाजार नहीं है
ये एक खेल है
एक ऐसा खेल जिसमें आपके पैसे को एक बॉक्स में बंद कर दिया गया है
और आप उस बॉक्स के बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं
लेकिन आप जानते नहीं कि बॉक्स का ताला आपके दिमाग में है
और उस ताले की चाबी आपके अंदर है
आपको बस ये समझना है कि आप खेल नहीं खेल रहे
आप खेल के भीतर हैं